उनके चले जाने के बाद
धड़कनो ने साथ नही छोड़ा मेरा,
आगर  मैं जिंदा हु आज भी
तो फिर सिर्फ इल्जाम उन पर कैसा।

पवन…

छोड़ दिया महलो में रहना उन्होंने ,अपनी मातृभूमि के खातिर

छोड़ आए वो तरसता अपनी माँ की बाहों को,सीने से लगने अपनी मातृभमि के खातिर…

पवन….